सत्यार्चन

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भलाई, नेकी या अच्छाई ???

Posted On 24 Jun, 2016 Celebrity Writer, Hindi Sahitya, Junction Forum में

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src=”http://sathyarchan.jagranjunction.com/files/2016/06/मजहब-मेरा-तेरा.jpg” alt=”भलाई, नेकी या अच्छाई???- मजहब मेरा-तेरा” title=”भलाई, नेकी या अच्छाई??? ” width=”476″ height=”517″ class=”size-full wp-image-1188115″ />[/caption]
भलाई, नेकी या अच्छाई ???
तीनों में से क्या सबसे अच्छा ?
तीनों ही का अर्थ तो एक ही है
फिर तीनों बराबर हुए ना?
जब ये एक जैसे हैं
तो इनके प्रतीक
आदि कालीन आदर्श जीवन के
प्रतिमान स्थापित करने वाले
आदर्शों की मूर्तियों वाले मंदिर,
नेक बंदों (पीरों/ फकीरों) की कब्र / मझार
नेकियों के शहन्शाह उस सर्वोपरि की इबादत वाली मस्जिद,
सबके भले की सीख देते उस सर्वव्यापी को
सर्वस्व समर्पण की प्रार्थना करते
गिरजाघर, गुरुद्वारे,चैत्य, मठ, आदि-आदि
छोटे बड़े तो नहीं हो सकते ना???
ना अच्छाई के समर्थन में प्रयुक्त
अलग-अलग तरीकों में से कोई छोटा बड़ा हो सकता है!
जो भी भ्रम है वह इन अलग-अलग पथ से
एक ही लक्ष्य को पाने का प्रयास करने वालों की
अज्ञानता जनित संकीर्णता के कारण है,
जो केवल अपने ही पथ को
लक्ष्य तक पहुँचने में सक्षम
मानने की भूल कर रहे हैं….
हालाँकि, लक्ष्य भेदने में
किसी के सफल होने का
आज तक कोई प्रमाण नहीं मिला है …!
फिर केवल मार्ग के चुनाव पर द्वेष?
क्यों???

वास्तव में लक्ष्य पाना ही जिनका उद्देश्य है
उन्हें अपने-अपने लक्ष्य और मार्ग के अतिरिक्त
दूसरे के लक्ष्य और चुने हुए मार्ग पर
विचार और विवाद करने की अपेक्षा
अमन, शांति और खामोशी से
अपने-अपने मार्ग पर पर बढ़ते रहना चाहिए!
शायद इस तरह
अपने लक्ष्य पर ही ध्यान देने से
लक्ष्य प्राप्त हो सके!

इस तरह वांछित लक्ष्य प्राप्त होगा या ना होगा
मैं नहीं जानता ….किंतु
इतना अवश्य दावे से कह सकता हूँ
कि इस से जीवन यात्रा
अवश्य माधुर्यमयी हो सकेगी!
अनंत काल से निरंतर चलायमान,
सांसाारिक रथ की इस जीवन यात्रा का,
अंत तो सुनिश्चित है ही…
गंतव्य अज्ञात !!!
केवल पँहुचने वाला ही जान सकता है…
तब तो सभी मार्गों को सबके लिये
सहज / सुगम उपलब्भ रहने देना
ही श्रेयस्कर होगा ना!
जिसे जो सुरम्य लगे वो उस मार्ग पर चल पड़े!
दूसरे की राह में गड्ढे खोदे बिना
या खोदने की सोचे बिना….!
हरि ओम्!!!
#सत्यार्चन

Web Title : भलाई, नेकी या Goodness???



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