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मरता लेखन हिन्दुस्तानी

Posted On: 6 Jul, 2016 Junction Forum,Celebrity Writer,Hindi Sahitya में

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-:मरता लेखन हिन्दुस्तानी -
रिंकी राउत जी का
प्रश्न बड़ा है ….
उचित है….
किन्तु साहस की सम्हाल आवश्यक है!
आत्मावलोकन भी!
हिन्दी लेखन के अधिकांश मंच भी असहाय से हैं ….
ब्लॉगर मंचों की मानसिकता भी ब्लागरों की ‘एक हाथ दे दूजे हाथ ले’ की छोटी
मानसिकता से ग्रस्त हैं या समर्थक हैं !
मैंने एक बहुत अच्छे लेखक के लेख को वरीयता हीन रखने का
कारण एक मंच द्वारा उनका ‘दूसरे ब्तागरों को समय / प्रतिक्रिया ना दे पाना’
सार्वजनिक रूप से बताया गया!!!
यानी किसी लेखक के लेखन का मूल्य उसकी सर्वाधिक समय तक मंच पर सक्रियता पर / (बेकार होने पर ही संभव) निर्भर है !
यानी मेरे जैसे अति व्यस्त लेखकों को
या तो लेखन से ही दूर रहना चाहिये
या अपना स्वयं का मंच बना लेना चाहिये
या सार्वजनिक मंच पर लेखन के नियमों को निभाने
पहले कई ब्लागरों को पढ़कर
केवल सकारात्मक प्रतिक्रिया करने योग्य
समय स्वयं को उपलब्ध कराएं
अन्यथा
आपके उस लेख को भी
उचित स्थान नहीं मिल सकेगा
जो हिंदी में होते हुए भी
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारी संगठनों में चर्चा बन
आपको अवार्ड योग्य की कतार में खड़ा करने का कारण बना…!
मेरा स्वयं का एक ऐसा ही लेख
लंबी प्रतीक्षा के बाद
उस मंच से हटा लिया मैंने!
कई और मंच भी परखे
किंतु अब हारकर
अपनी ही 28 वर्ष पुरानी प्रतिज्ञा
तोड़कर वापस प्रिंट मीडिया से जुड़ने विवश हो गया हूँ!
हर कोई जानना चाहता है
कहाँ से , कितनी किताबें / रचनायें छपी हैं मेरी
ऑनलाइन लेखन को
लेखन ही नहीं माना जाता !!!
हर जगह अपने से अधिक स्थापित को
लेखन के अतिरिक्त
अन्य किसी तरह प्रभावित कर
किसी मंच पर प्रवेश का अवसर पाऊँ!
जैसा पहले पहल कुमार बिस्वास को करना पड़ा था!
ऐसा नहीं कि मेरे पास ऐसे सम्पर्कों की कमी है
किंतु जैसे मेरी आत्मा को
स्नातक कहलाने कोई सनद ‘खरीदना’ अस्वीकार्य रहा
वैसे ही यह मार्ग भी अनुचित लगा!
.
अंतर्राष्ट्रीय भाषा अँग्रेजी से प्रतियोगिता करनी है तो
अंग्रेजी की तरह हिंदी की उपयोगिता पर भी विचारना आवश्यक होगा!
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी नियमित रूप से नये शब्दों / संक्षेपीकरणों का
समावेश अंग्रेजी के मान्य शब्दों के समन्वयक कर गुणवत्ता निर्धारक का कार्य करती है….
हम ऐसे किसी सर्वमान्य शब्दकोश को मान्यता पर
अगले 50 वर्ष बहस करने में आसानी से व्यर्थ गँवाने में सक्षम हैं!
और “संक्षेपीकरण हिंदी में …. बावले हुए हो क्या? ”
जैसे प्रश्नों की बौछार योग्य सुझाव है ना!.
तो मित्रो, इससे अच्छा तो यह रहेगा कि
मैं अपनी अंग्रेजी सुधारने पर ध्यान देकर
केवल अपनी मातृभाषा का बलिदान देकर
अपने राष्ट्र प्रेम को जीवित रख सकूँगा…!
अंग्रेजी में लिखना शुरू कर
बिना किसी ओछी शर्त को निभाये
और बड़े पाठक वर्ग का चहेता हो जाऊँ!
न्यू जर्सी से विगत 4 बरसों में कई बार आमंत्रण आया
किंतु किराये की व्यवस्था
और दुभाषिये के माध्यम से
अपने विचार रखना अधिक सुखकर ना लग रहा था अब तक … !
अस्तु;
कुछ तो करना ही होगा मुझे
अपने लेखन के हिन्दुस्तानी स्वरूप की
अस्मिता अक्षुण्ण रखते हुए
अपने लेखन के लिये!
अपनी आत्मा को पूरी तरह ना मरने देने के लिये!!!

Web Title : https://lekhanhindustani.wordpress.com



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